New Tax Regime: नई टैक्स व्यवस्था में सरकार ने खोला खजाना, करदाताओं को हो रहा इतना फायदा
New Tax Regime 2023 बजट 2023 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से सात लाख रुपये की छूट के एलान कर दिया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश नई टैक्स रिजीम को लोकप्रिय बनाने की है। (फाइल फोटो)
By Abhinav ShalyaEdited By: Abhinav ShalyaUpdated: Fri, 03 Feb 2023 03:17 PM (IST)
नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। Budget 2023 में नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में आयकर छूट की सीमा को सात लाख रुपये करने की घोषणा से देश में हर वर्ग के टैक्सपेयर्स को लाभ होगा। सरकार को आशा है कि इसे आने वाले समय में अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा। देश के सबसे बड़े आयकर अधिकारी की ओर से शुक्रवार को ये बात कही गई।
बता दें, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से आम बजट 2023-24 में व्यक्तिगत इनकम टैक्स छूट की सीमा को सात लाख रुपये कर दिया गया है। इससे देश में नौकरी करने वाले लोगों को बड़ी राहत के रुप में देखा जा रहा है।
सीबीडीटी चेयरमैन नितिन गुप्ता का बयान
सीबीडीटी चेयरमैन नितिन गुप्ता ने एक कार्यक्रम में कहा कि नई टैक्स व्यवस्था में सभी वेतनभोगी को 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा और इसका असर यह होगा कि सालाना 7.50 लाख रुपये तक की आय वाले वेतनभोगियों को अब कोई टैक्स नहीं देना होगा। इनकम टैक्स छूट लेने के लिए अधिक निवेश प्लान नहीं रखने वालों को नई टैक्स व्यवस्था में अधिक फायदा होगा। उन्होंने कहा कि स्कीम को लोगों के लिए अधिक से अधिक फायदेमंद बनाने की कोशिश की है, क्योंकि नई टैक्स व्यवस्था बिल्कुल सरल व सुगम है।इस व्यवस्था में टैक्सपेयर्स को कोई दस्तावेज लगाने की जरूरत नहीं है और काम के लिहाज से टैक्स प्रशासकों के लिए भी यह स्कीम आसान है। नई टैक्स व्यवस्था में तीन लाख रुपये तक की आय को इनकम टैक्स से मुक्त रखा गया है। तीन लाख रुपये से अधिक और छह लाख रुपए तक की आय पर पांच प्रतिशत टैक्स रखा गया है, लेकिन सरकार ने सात लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लेने की घोषणा की है। ऐसे में 3-7 लाख रुपये तक की आय पर, जो 25,000 रुपये का टैक्स बनेगा, वह सरकार वहन करेगी।
टैक्सपेयर्स के हित में कार्य कर रही सरकार
CBDT चेयरमैन नितिन गुप्ता ने कहा कि पुरानी टैक्स रिजीम में सरकार ने बदलाव नहीं किया है। हमने केवल नई टैक्स रिजीम में बदलाव किया है। तीन से सात लाख रुपये की आय को टैक्स छूट के दायरे में लाने से सरकार 25,000 रुपये प्रति करदाता भार वहन करेगी।