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प्रदूषण की मौजूदा स्थिति में बंद हो जानी चाहिए पूरी दिल्ली, जानिए क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ

प्रदूषण की मौजूदा स्थिति उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और बचाव के तरीकों के संदर्भ में डॉ. अरविंद कुमार ने लोगों को सलाह दी है।

By Mangal YadavEdited By: Updated: Mon, 04 Nov 2019 10:41 AM (IST)
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प्रदूषण की मौजूदा स्थिति में बंद हो जानी चाहिए पूरी दिल्ली, जानिए क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ
नई दिल्ली। पिछले तीन दिनों से दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील है। इस वजह से हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई है। प्रदूषण घातक स्तर पर पहुंच गया है। अस्पतालों में सांस व हृदय की बीमारियों से पीड़ित होकर मरीज पहुंच रहे हैं। प्रदूषण की मौजूदा स्थिति, उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और बचाव के तरीकों के संदर्भ में लंग केयर फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. अरविंद कुमार से रणविजय सिंह से बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:

प्रदूषण के कारण मेडिकल इमरजेंसी घोषित है। इसका क्या मतलब है?

-विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हवा की गुणवत्ता के मानक तय किए हैं। डब्ल्यूएचओ ने पीएम-2.5 की मात्र 20 व पीएम-10 की मात्र 25 तय की है। भारत में सरकार ने पीएम-2.5 का सामान्य स्तर 60 व पीएम-10 का सामान्य स्तर 100 तय की है। मेडिकल इमरजेंसी का मतलब यह है कि प्रदूषण का स्तर जैसे-जैसे बढ़ता है, वह स्वास्थ्य के लिए उतना हानिकारक होता जाता है।

एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) जब 300 के स्तर को पार कर जाए तो खुली हवा में सांस लेने पर तो लोग बीमार हो ही सकते हैं, घर के अंदर बैठे होने पर भी सांस लेने पर स्वास्थ्य को नुकसान होने का खतरा रहता है। इसे मेडिकल इमरजेंसी कहा जाता है। प्रदूषण की मौजूदा स्थिति यह है कि दिल्ली रुक जानी चाहिए। स्कूलों के अलावा सभी दफ्तरों को भी बंद कर देना चाहिए। सड़कों पर अधिक वाहन, बस व ट्रक नहीं चलने चाहिए और लोगों को घर में बंद रहना चाहिए।

प्रदूषण का स्वास्थ्य पर तात्कालिक व दीर्घकालिक रूप से क्या असर पड़ता है?

-प्रदूषण का तात्कालिक असर हर कोई महसूस कर रहा है। घर से बाहर निकलने पर आंखों में जलन होने लगती है। इस वजह से हर दिन दो से चार बार साफ पानी से आंख साफ करना चाहिए। गले में खराश होने लगे तो हल्के गर्म पानी से गरारा करना चाहिए। इसके अलावा अस्थमा व सांस की अन्य बीमारियां बढ़ जाती है।

बच्चों व बुजुर्गों पर इसका असर अधिक पड़ता है। हर व्यक्ति आंखों में जलन व गले में खराश से पीड़ित है। अस्पताल में अस्थमा से पीड़ित होकर पहुंचने वाले कई मरीजों पर दवाओं का असर नहीं हो रहा है। इस वजह से उन्हें आइसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ रहा है। मेरे दो परिचित लोगों को निमोनिया हो गया। इस वजह से उन्हें आइसीयू में भर्ती करना पड़ा।

प्रदूषण से बचाव में मास्क कितना कारगर है?

-हाल ही में सरकारी स्कूलों में मास्क वितरित करने का वीडियो देखा। यह हैरान करने वाला है। मास्क से पूरा बचाव नहीं हो सकता। मास्क तभी कारगर होगा जब वह नाक व चेहरे से पूरी तरह चिपका रहे। यदि मास्क ढीला है तो इसका फायदा नहीं है। मास्क पहनने पर सांस लेने के लिए दोगुना ताकत लगानी पड़ती है। इस कारण थोड़ी देर में ही लोग मास्क हटा लेते हैं।

एयर प्यूरिफायर कितना असरदार है?

-एयर प्यूरिफायर तभी असरदार होगा जब कमरे को हमेशा बंद रखा जाए। साथ प्यूरिफायर की क्षमता कमरे के आकार के बराबर होनी चाहिए। खिड़की व दरवाजा खुलने पर प्रदूषक तत्व दोबारा कमरे में भर जाता है। इसलिए प्यूरिफायर भी खास काम नहीं कर रहा है।

प्रदूषण से बचने का क्या तरीका है?

प्रदूषण की जो मौजूदा स्थिति है उससे किसी भी सूरत में पूरी तरह बचाव संभव नहीं है। यहां मास्क बांटकर व प्यूरिफायर से प्रदूषण कम करने पर जोर दिया जा रहा है। दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है जहां मास्क वितरित कर प्रदूषण कम किया गया हो। इसके लिए प्रदूषण के लिए जिम्मेदार स्नोतों पर अंकुश होगा।

चीन ने भी प्रदूषण के स्रोतों पर अंकुश लगाकर ही 40 से 50 फीसद प्रदूषण कम करने में सफलता हासिल की है। यहां भी सबको मिलकर प्रयास करना होगा। निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करना होगा। इसके अलावा अन्य कारणों की पहचान कर उस पर अंकुश लगाना होगा। फिलहाल एंटी एलर्जिक दवाएं लेने से प्रदूषण से थोड़ा बचाव होगा। साथ ही एन-95 मास्क से थोड़ा बचाव होगा।

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