महंगी गाड़ियां चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दुबई से हो रहा था संचालन; सप्लायर और रिसीवर सहित आठ गिरफ्तार
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह दुबई से आमिर पाशा द्वारा संचालित किया जा रहा था। आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की 15 महंगी गाड़ियां बरामद की गई हैं। क्राइम ब्रांच मामले की गहन जांच कर रही है। इनके साथ फर्जी नंबर प्लेट फर्जी आर/सी और डुप्लीकेट रिमोट कीज भी बरामद की गई हैं।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। महंगी कारों को चोरी करने में माहिर अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए क्राइम ब्रांच की टीम ने आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरोह में वाहन चोर, सप्लायर और रिसीवर शामिल हैं। गिरोह का संचालन दुबई से आमिर पाशा नामक आरोपित द्वारा किया जा रहा था।
दिल्ली से उनकी निशानदेही पर 15 महंगी चोरी की गाड़ियां बरामद की गईं। इनके साथ फर्जी नंबर प्लेट, फर्जी आर/सी और डुप्लीकेट रिमोट कीज भी बरामद की गई हैं। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बुलंदशहर के ताज मोहम्मद उर्फ ताजू उर्फ चवन्नी, सीलमपुर के इमरान खान उर्फ गुड्डू, मुंबई के बांद्रा के कुणाल सुभाष जायसवाल, जसोला के अकबर, यूपी मुरादाबाद के मतीन खान, मेरठ के नागेंद्र सिंह उर्फ नागिन, निलोठी एक्सटेंशन के मनीष आर्य और गाजियाबाद के नदीम के रूप में हुई है।
आरोपित किआ सेल्टोस, हुंडई क्रेटा, टोयोटा फार्च्यूनर और महिंद्रा थार जैसी लोकप्रिय गाड़ियों को निशाना बनाते थे। पुलिस मास्टरमाइंड आमिर पाशा सहित फरार सदस्यों को पकड़ने और अधिक चोरी की गई गाड़ियों को बरामद करने के लिए जांच कर रही है।
बीते साल सिंडिकेट का मुख्य सदस्य ताज मोहम्मद हुआ था गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच की उपायुक्त अपूर्वा गुप्ता के मुताबिक, बीते वर्ष 18 अगस्त को सिंडिकेट के प्रमुख सदस्य ताज मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया था, जिसने गिरोह के संचालन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी थी। उसके कब्जे से बरामद वाहन की जांच करने कई राज्यों में वाहन चोरी की साजिश रचने के संदिग्ध संगठित गिरोह का पता लगाना शुरू किया गया।
26 अप्रैल तक चले अभियान में टीम ने एसीपी अरविंद कुमार की देखरेख में और इंस्पेक्टर अरुण सिंधु के नेतृत्व में गिरोह के आठ आरोपितों की गिरफ्तारी करते हुए टीम ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों से चोरी की गई कुल 15 महंगी गाड़ियां बरामद कीं।
दुबई से संचालित हो रहा था सिंडिकेट
इस अंतरराज्यीय वाहन चोरी सिंडिकेट के पीछे का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा आमिर पाशा कर रहा था। वह गिरोह के सदस्यों के बीच गुमनामी बनाए रखते हुए देश भर में सिंडिकेट के वित्त का प्रबंधन कर रहा था ताकि सिंडिकेट के भीतर कोई भी व्यक्ति दूसरों की पहचान या भूमिका न जान सके। संगठन और नियंत्रण के इस स्तर ने आमिर को कई वर्षों तक कई राज्यों में सिंडिकेट के संचालन को बनाए रखने में मदद की।
इस प्रकार काम करता था गिरोह
ताज मोहम्मद एक दशक से अधिक समय से वाहन चोरी सिंडिकेट का मुख्य संचालक रहा। उसकी चोरी के वाहनों को राज्यों में विभिन्न रिसीवरों तक पहुंचाने की जिम्मेदार थी। वह दुबई में आमिर पाशा से सीधा संपर्क रखता था। उसके खिलाफ दिल्ली में डकैती, वाहन चोरी, रात में चोरी और शस्त्र अधिनियम के तहत 70 से अधिक मामले दर्ज हैं।
कुणाल चोरी के वाहनों का मुख्य रिसीवर और वितरक
इमरान सिंडिकेट के लिए तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में काम करता था। वह ईसीएम कोड हैक करने और कीज प्रोग्रामिंग डिवाइस जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग करके वाहन सुरक्षा प्रणालियों को बायपास करने में माहिर था। वह पहले दिल्ली में दर्ज वाहन चोरी के छह आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। कुणाल चोरी के वाहनों का मुख्य रिसीवर और वितरक था। उसने मुंबई, पुणे और नासिक जैसे प्रमुख शहरों में चोरी की कारों को फिर से बेचने में मदद की।
आमिर पाशा के निर्देश पर करता था गोरखधंधा
कुणाल ने पूछताछ के दौरान मतीन खान से कई चोरी के वाहन खरीदने की बात स्वीकारी। वह पहले पांच वाहन चोरी के मामलों में शामिल रहा है। अकबर चोरी की गाड़ियों के रिसीवर और सिंडिकेट के लिए फाइनेंसर दोनों के रूप में काम करता था। वह आमिर पाशा के निर्देश पर पूर्वोत्तर भारत और बंगाल में खरीदारों को चोरी की गाड़ियों की डिलीवरी का काम संभालता था।
उसके खिलाफ डकैती, वाहन चोरी, रात में चोरी, एनडीपीएस, धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट के तहत 60 से अधिक मामले दर्ज हैं। मतीन खान ताज मोहम्मद, रिजवान और इमरान से चोरी की गाड़ियों को प्राप्त करने में बिचौलिए के रूप में काम करता था। उसने इन कारों को वडोदरा, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों में कुणाल और अन्य रिसीवरों को सप्लाई किया। मतीन दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में वाहन चोरी के दस आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।
नागेंद्र सिंह ट्रांसपोर्टर और रिसीवर का करता था काम
नागेंद्र सिंह सिंडिकेट के भीतर ट्रांसपोर्टर और रिसीवर के रूप में काम करता था। उसकी महत्वपूर्ण भूमिका में दीमापुर, नागालैंड जैसे दूरदराज के क्षेत्रों सहित राज्य की सीमाओं में चोरी के वाहनों को पहुंचाना शामिल था। उसके खिलाफ दिल्ली और राजस्थान में डकैती, वाहन चोरी सहित 60 से अधिक मामले दर्ज हैं। मनीष आर्य ने चोरी की गाड़ियों के परिवहन और डिलीवरी में नागेंद्र की सहायता की थी। नदीम ने भी चोरी की गाड़ियों के परिवहन और डिलीवरी में नागेंद्र की सहायता की थी।
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