Himachal News: विधानसभा और लोकसभा चुनाव को लेकर चिंतपूर्णी के मतदाताओं का टेस्ट अलग, जानें क्या है मुख्य कारण
Himachal News हिमाचल प्रदेश के चिंतपूर्णी में कांग्रेस और भाजपा की परिस्थितियां बदल गई हैं। इसका मुख्य कारण है यहां के मतदाताओं की रूचि। चिंतपूर्णी से विस चुनाव में कांग्रेस की स्थिति बेहद मजबूत रही है और इस समयावधि में कांग्रेस को एक बार ही पराजय का सामना करना पड़ा। वहीं इसके विपरीत इस क्षेत्र में लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन में भी निरंतर सुधार देखा गया।
नीरज पराशर, चिंतपूर्णी। दो दशक के इतिहास में चिंतपूर्णी से विस चुनाव (Himachal Assembly By-Election 2024) में कांग्रेस की स्थिति बेहद मजबूत रही है। साथ ही इस समयावधि में कांग्रेस को एक बार ही पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन ठीक इसके विपरीत इस क्षेत्र में लोकसभा चुनाव (Himachal Lok Sabha Election 2024) में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन में भी निरंतर सुधार देखा गया। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि विधानसभा और लाेकसभा चुनाव को लेकर यहां के मतदाता की रूचि अलग-अलग है।
2004 के लोकसभा चुनाव में रही थी आगे
2003 के विस चुनाव में कांग्रेस के राकेश कालिया 10,881 मतों से जीते थे, लेकिन उसके ठीक एक वर्ष बाद हुए 2004 लोस चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे राम लाल ठाकुर की लीड का अंतर कम होकर 6289 मत रह गया था।2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इस क्षेत्र के 74 में 60 बूथों पर आगे रही थी। उस चुनाव में कांग्रेस को इस विस क्षेत्र से 20,073 मत मिले तो भाजपा को 13,789 वोटों से संतोष करना पड़ा था। उसके बाद 2007 के विस चुनाव में कांग्रेस के राकेश कालिया की जीत का अंतर बढ़कर 16052 मत हो गया।
2009 में भाजपा के लिए परिस्थितियां बदली
वहीं, 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए परिस्थितियां बदली हुई नजर आईं। मुकाबला तब कांग्रेस के नरेंद्र ठाकुर और बीजेपी के अनुराग ठाकुर के बीच था। बीजेपी को इस चुनाव में 26026 तो कांग्रेस को 19072 मत मिले। भाजपा को चिंतपूर्णी विस क्षेत्र से उस चुनाव में 6974 मतों की बढ़त मिली।धार बेल्ट में आशानुरूप मत भाजपा को न मिलने के बावजूद भाजपा को इस चुनाव में 25682 मत मिले तो कांग्रेस के राजेंद्र राणा को 22078 वोटों से संतोष करना पड़ा। फिर 2012 के विस चुनाव में भाजपा पर कांग्रेस एक बार भारी पड़ी। बेहद निकटतम मुकाबले में कांग्रेस के कुलदीप कुमार ने भाजपा के बलवीर चौधरी को 438 मतों से मात दे दी। बात 2914 के लोस चुनाव की जाए तो इस बार बीजेपी के अनुराग ठाकुर के सामने कांग्रेस के राजेंद्र राणा थे।
चिंतपूर्णी क्षेत्र में मिले थे इतने वोट
चिंतपूर्णी क्षेत्र में भाजपा को 25,682 तो कांग्रेस को 22,078 वोट मिले। भाजपा की लीड इस क्षेत्र से 3604 रही। वहीं, 2017 के विस चुनाव में कांग्रेस लगातार जीत की हैट्रिक लगाने के बाद चुनाव हार गई। भाजपा के बलवीर चौधरी ने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप कुमार को 8579 मतों से हराया। इसके बाद हुए वर्ष 2019 के लोस चुनाव में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबलेग दुगने मत मिले।
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भाजपा के पक्ष में माहौल इस तरह से था कि कुल 102 बूथ पर कांग्रेस की लीड मात्र 2 बूथ तक सिमट गई। इस चुनाव में भाजपा को 38,552 तो कांग्रेस को 19,188 मत मिले। लेकिन इस प्रचंड लहर के बावजूद तीन वर्ष बाद हुए 2022 के विस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सुदर्शन सिंह बबलू की जीत हुई और भाजपा के बलवीर को 4858 मतों से पराजित किया।
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