Lok Sabha Election: अनंतनाग-राजौरी सीट पर बंपर मतदान की उम्मीद, महज चार घंटे में ही टूट गया 2019 का मतदान रिकॉर्ड
लोकसभा सीट अनंतनाग राजौरी पर इस बार बंपर वोटिंग होने की उम्मीद है। साल 2019 में जहां इस सीट पर 9.7 फीसदी वोटिंग हुई थी। वहीं इस पर महज चार घंटों में ही साल 2019 के मतदान का रिकॉर्ड टूट गया है। 11 बजे तक इस सीट पर 23.11 प्रतिशत मतदान हुआ है। 18.36 लाख मतदाता 20 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला कर रहे हैं। मतदान अभी भी जारी है।
नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग-राजौरी संसदीय क्षेत्र में मतदान जारी है। यहां पर 20 उम्मीदवारों में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, नेकां उम्मीदवार व गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के धर्मगुरू मियां अल्ताफ अहमद, नौकरशाह से राजनेता बने अपनी पार्टी के उम्मीदवार जफर इकबाल मन्हास शामिल हैं।
11 बजे तक 23.11 प्रतिशत मतदान
साल 2019 में अनंतनाग लोकसभा सीट के लिए मात्र 9.7 प्रतिशत मतदान हुआ था और वर्ष 2017 में इस सीट पर उपचुनाव को अंतिम समय में स्थगित करना पड़ा था। कश्मीर में बदली आबोहवा का असर आज अनंतनाग- राजौरी निर्वाचन क्षेत्र में भी नजर आ रहा है जहां आज सुबह 11 बजे तक 23.11 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके हैं।
बता दें कि यहां 1990 के बाद से मतदान का प्रतिशत कश्मीर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में हमेशा कम रहा है। उम्मीद है कि इस बार 55-60 प्रतिशत तक मतदान होगा। अगर बात पिछले आंकड़ों की करें तो वर्ष 2019 अंनतनाग संसदीय क्षेत्र मात्र 9.7 प्रतिशत मतदान हुआ था। वर्ष 2017 में तत्कालीन सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए उपचुनाव रद करना पड़ा था। इसलिए सभी को उम्मीद है कि प्रदेश में बह रही लोकतंत्र की बयार में स्थानीय मतदाता अतीत में रही चुनावी उदासीनता को छोड़ पूरे उत्साह के साथ मतदान में भाग लेंगे।
अनंतनाग-राजौरी सीट पर कुल 18.36 मतदाता
जम्मू कश्मीर में अनंतनाग-राजौरी एकमात्र ऐसा विशिष्ट संसदीय क्षेत्र है जो दोनों प्रांतों में और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के आर-पार फैला है। सांस्कृतिक, सामाजिक, भौगोलिक और आर्थिक विषमताओं वाले संसदीय क्षेत्र में 18,36,576 मतदाताओं में 9,33,647 पुरुष और 9,02,902 महिला मतदाताओं के अलावा 27 ट्रांसजेंडर हैं। इन मतदाताओं में 17967 दिव्यांग हैं और 540 मतदाता शतायु हैं।
कुल मिलाकर 18.36 मतदाता हैं जिनके लिए बनाए गए 2338 मतदान केंद्रों में से 1600 अतिसंवेदनशील हैं और 19 मतदान केंद्र एलओसी के साथ सटे इलाकों में बनाए हैं। लगभग नौ हजार अधिकारी व कर्मी मतदान का जिम्मा संभालेंगे। पूरे क्षेत्र में लगभग 81 हजार मतदाताओं की आयु 18-23 वर्ष के बीच है। विस्थापित कश्मीरी मतदाताओं की तादाद लगभग 26 हजार है।
जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव
अनंतनाग,कुलगाम और शोपियां में जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव माना जाता है। पहलगाम, हीरपोरा, सुरनकोट और शाहदरा में हुए आतंकी हमलो को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी आतंकियों का प्रभाव नजर नहीं आया है। चुनावी रैलियां और सभाएं अगर किसी जगह प्रभावित रही हैं तो सिर्फ मौसम के कारण या फिर दो राजनीतिक दलों के बीच समय के टकराव को देखते हुए। सुरक्षा कारणों से कहीं भी इन्हें नहीं रोकना पड़ा है। बीते मार्च से अब तक पहलगाम, डुरू कोकरनाग से लेकर कालाकोट, मेंढर तक तीन हजार छोटी बड़ी चुनावी बैठकें और सभाएं हुई हैं। बड़ी रैलियों की संख्या लगभग 800 है।
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