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राजकीय मानभूम छऊ नृत्य कला केंद्र के कलाकारों को हाई कोर्ट से राहत, सेवा से हटा नहीं सकते; आउटसोर्सिंग से नई बहाली पर रोक

Published: Mon, 26 Oct 2026 02:25 PM (IST)Updated: Mon, 26 Oct 2026 06:33 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने सिल्ली के छऊ नृत्य कलाकारों को बड़ी राहत देते हुए आउटसोर्सिंग से नई बहाली पर रोक ...और पढ़ें

14 वर्षों से छऊ नृत्य के संरक्षण और प्रदर्शन से जुड़े हैं और अपनी सेवा नियमित करने की मांग कर रहे हैं।

14 वर्षों से छऊ नृत्य के संरक्षण और प्रदर्शन से जुड़े हैं और अपनी सेवा नियमित करने की मांग कर रहे हैं।

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने सिल्ली छऊ कलाकारों की आउटसोर्सिंग भर्ती रोकी।

  2. वर्तमान कलाकारों को सेवा से न हटाने का निर्देश दिया।

  3. कलाकार 14 वर्षों से छऊ नृत्य का संरक्षण कर रहे हैं।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सिल्ली के छऊ नृत्य कलाकारों को हटाकर आउटसोर्स के जरिए नियुक्ति करने के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई।

सुनवाई के बाद अदालत ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से अनुबंध पर नई बहाली के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। अदालत राज्य सरकार को प्रार्थियों को सेवा से नहीं हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले में सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

इस संबंध में राजकीय मानभूम छऊ नृत्य कला केंद्र, सिल्ली में कार्यरत सुनील कुमार सिंह व अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, नेहा मेहता और दीक्षा द्विवेदी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता 18 अप्रैल 2012 से राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत पदों पर केंद्र में लगातार कार्यरत हैं।

उनकी नियुक्तियां विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के बाद की गई थी। जिसे राज्य सरकार अनुमोदित भी किया था। इस बीच सरकार के 20 मार्च 2026 एक पत्र जारी कर कहा है कि सिल्ली की संस्था के सभी पदों पर नए संविदा या आउटसोर्स के लिए नियुक्ति की जाएगी है।

अदालत को बतायागया कि याचिकाकर्ताओं पिछले 14 वर्षों से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह किसी अन्य संविदा या आउटसोर्स कर्मचारियों को नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार के आदेश से वर्तमान कलाकारों को सेवा से हटाए जाने की स्थिति बन गई, जिसके बाद कलाकारों ने याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं ने स्वीकृत पदों पर अपनी सेवा जारी रखने और नियमितीकरण के साथ-साथ पारिश्रमिक के भुगतान की भी मांग की है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने प्रस्तावित बहाली पर रोक लगाते हुए प्रार्थियों को सेवा से नहीं हटाने का आदेश दिया है।

UNESCO ने माना है धरोहर

छऊ नृत्य का सांस्कृतिक महत्व को यूनेस्को ने भी माना है। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मयूरभंज, पुरुलिया और सरायकेला-खरसावां (सिल्ली इसी क्षेत्र के अंतर्गत आता है) का छऊ नृत्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

वर्ष 2010 में यूनेस्को ने छऊ नृत्य को अपनी मानविकी की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था। ऐसे में, स्थानीय कलाकारों का संरक्षण और उनका आर्थिक संबल राज्य की संस्कृति को बचाने के लिए बेहद जरूरी है।

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