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CAA News: नागरिकता संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सीएए लागू करने पर रोक के लिए लगाई याचिका

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने नए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) नियम 2024 पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर कर दी है। याचिका में नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 और नागरिकता संशोधन नियम 2024 के विवादित प्रावधानों के निरंतर संचालन पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस प्रावधान से केवल कुछ धर्मों को फायदा होगा।

By Agency Edited By: Shalini Kumari Updated: Tue, 12 Mar 2024 09:02 PM (IST)
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CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू करने की अधिसूचना जारी किए 24 घंटे का समय भी नहीं बीता कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में उस पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाएं भी दाखिल हो गईं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आइयूएमएल) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन आफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग अर्जी दाखिल कर कोर्ट से सीएए लागू करने की अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है। इनमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में बहुत सी याचिकाएं लंबित हैं जिनमें सीएए की वैधानिकता को चुनौती दी गई है, ऐसे में उन याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक सीएए लागू करने पर रोक लगा दी जाए।

संसद ने 11 दिसंबर 2019 को सीएए पारित किया था और अगले दिन 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति ने उसे मंजूरी दे दी थी। इस कानून में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रविधान है। आइयूएमएल ने 12 दिसंबर यानी उसी दिन कानून को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दे दी थी। वैसे करीब 250 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में सीएए पर लंबित हैं।

शीर्ष अदालत ने कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इन्कार करते हुए 18 दिसंबर, 2019 को याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया था। उस वक्त केंद्र ने कोर्ट में कहा था कि अभी इसके नियम तय नहीं हुए हैं, इसलिए कानून फिलहाल लागू नहीं होगा। अब केंद्र ने 12 मार्च को सीएए लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

याचिका में कहा गया है कि जब केंद्र ने कानून पारित होने के साढ़े चार साल तक नियम तय कर इसे लागू नहीं किया तो अब भी इसकी कोई जल्दी नहीं है। इसमें धर्म के आधार पर नागरिकता देने की बात संविधान के प्रविधानों का उल्लंघन है। मुसलमानों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव किया गया है, इसमें उन्हें नागरिकता देने की बात नहीं है। जो लोग भारत आ चुके और यहीं रह रहे हैं व उन्हें वापस भेजे जाने का खतरा नहीं है तो फिर इसे लागू करने की इतनी जल्दबाजी क्यों?

मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद इसे लागू किया जाए। अगर कोर्ट याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सीएए रद कर देता है तो जिन लोगों को इस कानून के तहत नागरिकता मिल चुकी होगी, वह चली जाएगी और एक अजीब सी स्थिति पैदा होगी। इसलिए सीएए लागू करने पर रोक लगा दी जाए या फिर केंद्र को आदेश दिया जाए कि वह सभी लोगों को जोकि इस कानून में नागरिकता आवेदन के बाहर रखे गए हैं, उन्हें भी आवेदन करने की छूट दे।