Rama Ekadashi 2024: अक्टूबर महीने में कब है रमा एकादशी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग
सनातन धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (Rama Ekadashi 2024) तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागृत होते हैं। इस शुभ तिथि से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य किए जाते हैं। भगवान विष्णु संग धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुखों का आगमन होता है।
By Pravin KumarEdited By: Pravin KumarUpdated: Tue, 27 Aug 2024 08:34 PM (IST)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन रमा एकादशी (Rama Ekadashi Puja Vidhi) मनाई जाती है। इस शुभ तिथि पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त एकादशी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मत है कि एकादशी व्रत करने से साधक को मृत्यु लोक में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। अतः साधक भक्ति भाव से एकादशी व्रत पर भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। आइए, रमा एकादशी का शुभ मुहूर्त, योग एवं पारण का समय जानते हैं-
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रमा एकादशी शुभ मुहूर्त (Rama Ekadashi Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि सोमवार 27 अक्टूबर को सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन सोमवार 28 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 50 मिनट पर होगा। वैष्णव समाज के अनुयायी 28 अक्टूबर को रमा एकादशी पर व्रत रख भगवान विष्णु की पूजा-उपासना करेंगे। साधक स्थानीय पंचांग द्वारा निर्धारित डेट पर रमा एकादशी का व्रत रख सकते हैं। वहीं, साधक 29 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 31 मिनट से लेकर 10 बजकर 31 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं।
रमा एकादशी शुभ योग (Rama Ekadashi Shubh Yog)
ज्योतिषियों की मानें तो कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर इन्द्र योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का समापन 29 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 48 मिनट पर होगा। वहीं, रमा एकादशी पर पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का संयोग 29 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 24 मिनट तक है। इसके साथ ही बालव, कौलव एवं तैतिल करण के योग बन रहे हैं। इन योग में जगत के पालनहार भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी।पंचांग
सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 30 मिनट परसूर्यास्त - शाम 05 बजकर 39 मिनट परचंद्रोदय- देर रात 03 बजकर 36 मिनट पर ( 29 अक्टूबर)चंद्रास्त- दोपहर 03 बजकर 32 मिनट पर (29 अक्टूबर)ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 48 मिनट से 05 बजकर 39 मिनट तकविजय मुहूर्त - दोपहर 01 बजकर 56 मिनट से 02 बजकर 41 मिनट तकगोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 39 मिनट से 06 बजकर 05 मिनट तक
निशिता मुहूर्त - रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तकयह भी पढ़ें: इसलिए क्षीर सागर में निवास करते हैं भगवान श्री हरि विष्णु, जानिए इसके पीछे का रहस्यअस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।