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कौन हैं Pretraj Sarkar और क्यों मेहंदीपुर Balaji से पहले की जाती है इनकी पूजा?

Pretraj Sarkar धार्मिक मत है कि मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में बालाजी और प्रेतराज सरकार (Mehandipur Balaji Mandir Significance) के दर्शन मात्र से व्यक्ति के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के काल कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही व्यक्ति को सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है। बड़ी संख्या में साधक देव दर्शन हेतु मेहंदीपुर बालाजी मंदिर जाते हैं।

By Pravin KumarEdited By: Pravin KumarPublished: Mon, 24 Jun 2024 09:27 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jun 2024 09:27 PM (IST)
Mehandipur Balaji Temple: कब हुई थी हनुमान जी की ऋषि नीलासुर से भेंट ? (Image Credit: mehandipurbalajidham.com)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। इस दिन राम परिवार संग हनुमान जी की पूजा की जाती है। साथ ही मंगलवार का व्रत रखा जाता है। ज्योतिष भी मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने की सलाह देते हैं। हुनमान जी की पूजा करने से न केवल कुंडली में अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त हो जाता है, बल्कि शुभ ग्रह भी मजबूत होते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान जी की उपासना करने से मंगल दोष भी दूर होता है। अतः साधक मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करते हैं। साथ ही मंदिर जाकर हनुमान जी के दर्शन करते हैं। इस अवसर पर मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में बड़ी संख्या में साधक हनुमान जी की पूजा और दर्शन हेतु आते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि क्यों मेहंदीपुर बालाजी मंदिर (Mehandipur Balaji) में बालाजी से पहले प्रेतराज सरकार की पूजा की जाती है? आइए, इससे जुड़ी पौराणिक कथा जानते हैं-

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कथा

ऋषि नीलासुर त्रेता युग के समकालीन थे। तत्कालीन समय में मां केकैयी के हठ के चलते भगवान श्रीराम को चौदह वर्षों का वनवास मिला था। भगवान श्रीराम अपनी धर्मपत्नी मां सीता और अनुज लक्षमण के साथ वनवास में थे। उन दिनों रावण ने छल से मां सीता का हरण कर लिया। मां सीता की खोज में हनुमान जी को लंका भेजा गया था। इसका विवरण वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में मिलती है।

हनुमान जी ने मां जानकी से भेंट करने के बाद अशोक वन में बालक समान खूब उत्पात मचाया था। यह देख लंका नरेश ने हनुमान जी को बंदी बना लिया और हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। उस समय हनुमान जी ने पूरी लंका को जला दिया था। कहते हैं कि जब हनुमान जी लंका दहन कर रहे थे। तभी उनकी भेंट ऋषि नीलासुर से हुई थी। लंका दहन के समय हनुमान जी की शक्ति देख नीलासुर समझ गए थे कि ये कोई साधारण कपि नहीं हैं। ये जरूर कोई दैवीय शक्ति हैं।

तब नीलासुर ने हनुमान जी से परिचय पूछा कि आप कौन हैं और आपके आराध्य कौन हैं ? यह सुन हनुमान जी ने कहा कि मैं भगवान श्रीराम का सेवक हनुमान हूं और मेरे आराध्य जगत के पालनहार भगवान श्रीराम हैं। दशानन ने जगत की देवी मां सीता का हरण कर लिया है। मैं उसे आश्वस्त करने आया था कि वह मां सीता को जगत के पालनहार प्रभु श्रीराम को सकुशल लौटा दें, अन्यथा युद्ध के लिए तैयार रहें।

हनुमान जी के वचनों को सुनने के बाद नीलासुर ने भगवान श्रीराम के दर्शन की इच्छा प्रकट की। हनुमान जी ने वचन दिया कि जल्द श्रीराम उन्हें दर्शन देंगे। लंका विजय के समय भगवान श्रीराम ने ऋषि नीलासुर को दर्शन दिया था। भगवान श्रीराम के दर्शन पाकर ऋषि नीलासुर का जीवन धन्य हो गया। उस समय नीलासुर ने भगवान श्रीराम से सदैव कृपा बरसाने की कामना की।

कहते हैं कि भगवान श्रीराम के बैकुंठ लौटने के बाद हनुमान जी मेहंदीपुर में बालाजी रूप में प्रकट हुए थे। उस समय उन्होंने नीलासुर को स्मरण किया और उन्हें प्रेतराज सरकार की उपाधि दी। साथ ही नीलासुर को न्याय करने और दंड देने का अधिकार दिया। इसके अलावा, नीलासुर को यह भी वरदान दिया कि मेहंदीपुर बालाजी मंदिर (Mehandipur Balaji Mandir Facts) में सबसे पहले प्रेतराज की पूजा की जाएगी। इस वरदान के चलते ही मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में प्रेतराज सरकार की पहले पूजा की जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।


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