Lucknow: रेलवे स्टेशनों पर एक जैसे दिखेंगे ओएसओपी के स्टाल, यात्रियों को पहचान करने में होगी आसानी
Railway News ओएसओपी का स्टाल रोजगार के अधिक अवसर सृजन करने के लिए तीन माह के लिए आवंटित किया जाएगा। तीन माह बाद किसी अन्य विक्रेता को अवसर दिया जाएगा। तीन माह के लिए के लिए टोकन के रूप में विक्रेता से छह हजार रुपये शुल्क लिया जाएगा।
By Vikas MishraEdited By: Updated: Wed, 19 Oct 2022 12:43 PM (IST)
लखनऊ, जागरण संवाददाता। हुनरमंद बेरोजगारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रेलवे की एक स्टेशन एक उत्पाद (ओएसओपी) के स्टाल अब देश भर में एक जैसे दिखायी देंगे। इससे यात्रियों को ओएसओपी स्टाल की पहचान करने में आसानी होगी, साथ ही रेलवे स्टेशनों की सुंदरता भी बढ़ेगी। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल प्रशासन के 19 स्टेशनों पर ऐसे ही स्टाल बनाए जाएंगे। इसको अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान से डिजाइन कराया गया है।
इस पायलट प्रोजेक्ट को एक नया कलेवर और नया स्वरूप प्रदान करते हुए राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान अहमदाबाद से रेलवे ने एक ही आकार और परिमाप के स्टालों को बनवाया है। इस योजना के तहत मंडल के लखनऊ एवं वाराणसी स्टेशनों पर दो-दो स्टाल जबकि अन्य चयनित स्टेशनों पर एक-एक स्टाल लगाए जा रहे हैं।लखनऊ स्टेशन पर लखनऊ की चिकनकारी, वाराणसी में वहां के काष्ठ के बने खिलौने, अमेठी स्टेशन पर मूंज उत्पाद,प्रतापगढ़ में आंवला उत्पाद, अयोध्या कैंट पर गुड़ के उत्पाद ,उन्नाव पर चमड़े के उत्पाद, सुलतानपुर पर मूंज के उत्पाद, रायबरेली में काष्ठ शिल्प उत्पाद, जौनपुर स्टेशन पर ऊनी कारपेट, बाराबंकी स्टेशन पर टेक्सटाइल उत्पाद, भदोही स्टेशन पर कारपेट उत्पाद, एवं अयोध्या स्टेशन पर गुड़ के उत्पाद, अकबरपुर स्टेशन पर हैंडलूम उत्पाद, शाहगंज स्टेशन पर ऊनी कारपेट, प्रयाग में मूंज उत्पाद, जंघई में ऊनी कारपेट, जौनपुर सिटी में ऊनी कारपेट, निहालगढ़ में तथा फूलपुर स्टेशनों पर मूंज के उत्पाद का विक्रय किया जाएगा।
तीन माह के लिए मिलेगा स्टालः ओएसओपी का स्टाल रोजगार के अधिक अवसर सृजन करने के लिए तीन माह के लिए आवंटित किया जाएगा। तीन माह बाद किसी अन्य विक्रेता को अवसर दिया जाएगा। तीन माह के लिए के लिए टोकन के रूप में विक्रेता से छह हजार रुपये शुल्क लिया जाएगा। एक स्टेशन पर एक से अधिक प्रविष्टियों के आने पर लाटरी से विक्रेता का चयन किया जाएगा। ये होंगे नियम
- एक स्टेशन,एक उत्पाद योजना को लागू करने के लिए जो भी इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी उसे रेलवे ही बनाएगा, बिजली बिल का भुगतान वास्तविक खपत के आधार पर लाइसेंसी को करना होगा।
- स्टाल के आवंटी कों उत्पाद को प्लेटफार्म पर घूमकर बेचने की अनुमति नहीं होगी
- लाइसेंसी को कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए स्वाइप मशीन, भीम मोबाइल वेलेट स्टाल पर रखना होगा
- रेलवे प्रशासन को अनुबंध को समाप्त करने का पूर्ण अधिकार होगा
- बिक्रीकर्ता को अपने पास स्टेशन निदेशक/ स्टेशन अधीक्षक से जारी परिचय पत्र रखना अनिवार्य होगा
- जनता को बेचे जाने वाली वस्तु की दर की सूची स्टाल पर प्रदर्शित की जाएगी
ओएसओपी के स्टालों में एकरुपता लाने के लिए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान अहमदाबाद से उनको डिजाइन किया गया है। अब किसी भी स्टेशन पर ओएसओपी स्टाल की पहचान आसानी से सकी जा सकेगी। -रेखा शर्मा, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, उत्तर रेलवे लखनऊ
आपके शहर की हर बड़ी खबर, अब आपके फोन पर। डाउनलोड करें लोकल न्यूज़ का सबसे भरोसेमंद साथी- जागरण लोकल ऐप।