रामलला ही नहीं उत्तराखंड के इस मंदिर के लिए Arun Yogiraj ने बनाई थी खास मूर्ति, PMO ने की थी स्पेशल रिक्वेस्ट
Arun Yogiraj अयोध्या में बनाई गई राम की प्रतिमा को सजीव रूप देने वाले योगीराज अरुण ने 12 फुट ऊंची व 35 टन भारी आदि शंकराचार्य प्रतिमा पिता योगीराज शिल्पी ने सहयोग से बनाई थी। यह प्रतिमा आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा बनाने के लिए मैसूर में एचडी कोट से काले ग्रेनाइट के पत्थर का चयन किया और इस पर वर्ष 2020 में काम शुरू कर दिया।
संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। सोमवार को अयोध्या राम मंदिर में स्थापित भगवान राम की प्रतिमा को बनाने वाले योगीराज अरूण ने ही केदारनाथ धाम में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा बनाई गई थी। जो वर्ष 2021 में स्थापित की गई थी। केदारनाथ त्रासदी में आदि शंकराचार्य की समाधि त्रासदी में बह गई थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत आदि शंकराचार्य समाधि का निर्माण किया गया।
अयोध्या में बनाई गई राम की प्रतिमा को सजीव रूप देने वाले योगीराज अरुण ने 12 फुट ऊंची व 35 टन भारी आदि शंकराचार्य प्रतिमा पिता योगीराज शिल्पी ने सहयोग से बनाई थी। यह प्रतिमा आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा बनाने के लिए मैसूर में एचडी कोट से काले ग्रेनाइट के पत्थर का चयन किया और इस पर वर्ष 2020 में काम शुरू कर दिया। 12 फुट ऊंची प्रतिमा का वजन करीब 35 टन है।
चिनूक हेलीकॉप्टर से केदारनाथ पहुंची प्रतिमा
प्रतिमा को भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से पहले गोचर व उसके बाद केदारनाथ धाम पहुंचाया गया। यह प्रतिमा कृष्णशिला पत्थर से तैयार की गई। धाम में तीर्थयात्रियों के लिए नया आकर्षण का केन्द्र है।2013 आपदा के बाद बनी थी नई प्रतिमा
केदारनाथ में जून 2013 में आई दैवीय आपदा में आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि बह गई थी। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देशों के क्रम में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत शंकराचार्य की समाधि का विशेष डिजाइन तैयार किया गया। केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे छह मीटर जमीन की खुदाई कर समाधि तैयार की गई है। समाधि के मध्य में शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
बाप-बेटे ने मिलकरबनाई ये प्रतिमा
मैसूर के मूर्तिकार योगीराज शिल्पी ने अपने पुत्र अरुण योगीराज के साथ मिलकर यह प्रतिमा तैयार की है। चमक के लिए इसे नारियल पानी से पॉलिश किया गया। इससे पहले शंकराचार्य की प्रतिमा बनाने के लिए देशभर के मूर्तिकारों ने अपने माडल पेश किए थे।प्रधानमंत्री कार्यालय ने किया था ये अनुबंध
प्रधानमंत्री कार्यालय से योगीराज शिल्पी से प्रतिमा तैयार करने को अनुबंध किया गया। योगीराज ने कच्चे माल के रूप में 120 टन वजनी पत्थर की खरीद की। छेनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद प्रतिमा का वजन 35 टन हो गया है। वर्ष 2020 में सितंबर में प्रतिमा बनाने का काम शुरू हुआ।
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