Bengal SSC Scam: ईडी ने पार्थ की जमानत का विरोध करते हुए दीं पांच दलीलें, कहा- प्रभावशाली हैं पूर्व मंत्री
ईडी के वकील फिरोज एडुल्जी ने पार्थ के प्रभावशाली होने के तर्क स्थापित करने के लिए कोर्ट में पांच दलीलें भी दीं। पहला गिरफ्तारी के बाद पार्थ ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फोन किया लेकिन मुख्यमंत्री ने फोन नहीं उठाया। ईडी ने दलील दी कि कोई भी मुख्यमंत्री को सीधे तौर पर तब तक फोन नहीं कर सकता जब तक वह प्रभावशाली न हो।
By Jagran NewsEdited By: Anurag GuptaUpdated: Thu, 27 Jul 2023 11:40 PM (IST)
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी प्रभावशाली हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने भर्ती घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की जमानत के विरोध में एक बार फिर यही तर्क उछाला। भर्ती भ्रष्टाचार मामले में पार्थ की जमानत पर गुरुवार को सुनवाई थी।
ED ने क्या कुछ कहा?
इसके लिए गुरुवार को उन्हें कोलकाता सिटी सेशन कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान ईडी ने दावा किया कि पार्थ राज्य में एक प्रभावशाली शख्सियत हैं। ईडी ने आरोप लगाया कि पार्थ ने अकेले ही राज्य की शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया। इसलिए उन्हें किसी भी तरह से जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
ईडी के वकील फिरोज एडुल्जी ने पार्थ के प्रभावशाली होने के तर्क स्थापित करने के लिए कोर्ट में पांच दलीलें भी दीं। पहला गिरफ्तारी के बाद पार्थ ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फोन किया, लेकिन मुख्यमंत्री ने फोन नहीं उठाया।
ईडी ने दलील दी कि कोई भी मुख्यमंत्री को सीधे तौर पर तब तक फोन नहीं कर सकता, जब तक वह प्रभावशाली न हो। दूसरा पार्थ के गिरफ्तारी ज्ञापन में उल्लेख है कि वे मुख्यमंत्री के रिश्तेदार हैं।
बीमार नहीं थे पार्थ: ईडी
ईडी ने दावा किया कि अगर वह प्रभावशाली नहीं होता तो ऐसा कोई संदर्भ नहीं होता। तीसरा गिरफ्तारी के बाद पार्थ को बीमारी के चलते एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन ईडी ने कोर्ट में दावा किया कि पार्थ बीमार नहीं थे।ईडी ने तर्क दिया,
आपके शहर की हर बड़ी खबर, अब आपके फोन पर। डाउनलोड करें लोकल न्यूज़ का सबसे भरोसेमंद साथी- जागरण लोकल ऐप।ईडी ने दावा किया कि पार्थ ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बीमारी का फर्जी बहाना बनाया था और वह एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती होने में सक्षम थे, क्योंकि वह प्रभावशाली थे। चौथा जेल कोड के मुताबिक, किसी भी कैदी को जेल में अंगूठियां पहनने की इजाजत नहीं है, लेकिन पार्थ ने लंबे समय तक जेल में अंगूठी पहनी।पार्थ को उच्च न्यायालय के निर्देश पर भुवनेश्वर एम्स ले जाया गया था, लेकिन वहां डाक्टरों को पार्थ के शरीर में बीमारी का कोई लक्षण नहीं मिला।